क्रांति की धुरी
किसान आंदोलन
भारत में क्रांति की धुरी किसान वर्ग है, कुछ लोग दूर बैठ कर आंदोलन की आग से हाथ ताप रहे है और इस सर्दी का मज़ा ले रहे है, जैसे ही उनका मज़ा खत्म होगा वे यही आग इन्ही किसानों और मज़दूरों के पेट पर उलीच देंगे, इस आंदोलन को पूरी तरह किसान आंदोलन समझने का धोखा नही खाना चाहिए यहाँ कई सारी कठपुतलीयां नाच रही है और कई सारे कटमुल्ले बिरयानी परोस रहे है.हमारा देश हर समय कई विषमताओं से जूझता रहता है, सरकार को असल किसान और मज़दूर की विषमता को भी समझना चाहिए, मज़दूर और किसान की भीड़ में बैठे रहना ही उनका समर्थन नही है. उनकी रोज़ की देनदिनी की भी खबर रखना जरुरी है.इतिहास में देखा गया है की कोई आंदोलन किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रारम्भ होता है, लेकिन उसकी परीनीति किसी और उद्देश्य को प्राप्त करती है.अगर आंदोलन की आत्मा शुद्ध होगी तो वो अवश्य ही अपने मूल उद्देश्य को प्राप्त करेगा.

Comments
Post a Comment