मस्का पाँव रिश्ते

 किसी भी रिश्ते में लोग आजकल जोड़ाव के बनिस्पद अलगाव में ज्यादा रूचि रखते हैं. लोग आपसे लगाव विशेष उद्देश्य की पूर्ति तक ही रखते हैं.जैसे ही उनकी उद्देश्य पूर्ति होती है वो पहली फुर्सत में तुरंत फुरन्त अपने अंदर अलगाव की भावना जगा बैठते हैं वो भी इतनी भीषण की कहते हैं आजके बाद मैं तुम्हारी सकल-बकल नही देखना चहता/चाहती. ये आज कल का सबसे प्रचलित फैशन हो गया है.ये फैशन तब तक ही सार्थक होता रहता है जब तक उन अलगाव वादियों का निशाना सही ठिकाने पर लगता रहता है, अगर किसी दिन भी निशाना चूका तो इन्हे लेने के देने पड़ सकते हैं. लेकिन ऐसा होता कभी नही क्योंकि ईश्वर ने इस जगत में अंधेर के लिये थोड़ी जगह छोड़ रखी है.इस सब के पीछे इनकी भारी भरकम प्लानिंग होती है. वो आपकी ज़िन्दगी के ग्लूकोज में शक्कर की तरह मिलने की कोशिश करते हैं और मिल भी जाते हैं, मीठा किसको पसंद नही?इसमें आपकी गलती नही है बिलकुल भी।वो आपकी ज़िन्दगी में आते ही इस तरह हैं कि आपको सब कुछ भला भला सा लगता है. मस्का पाव यानी पाव का मस्का उनका मैन हथियार होता है. उनकी बातों में इतना मस्का होता है कि जितना मुंबई के किसी ईरानी रेस्टोरेंट के मस्का पाव में भी नही होता।


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